नमस्कार किसान साथियों। सरसों में रोग । मोयला किट क्या है । जड़गलन क्या है। बग कीट। सरसों में होने वाले रोग ।
आरा मक्खी किट , तना ग्लन रोग। जानेंगे सम्पूर्ण जानकारी इस पोस्ट में
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सरसों में चल रही गंभीर समस्या जड़गल्न
किसान साथियों राजस्थान , हरियाणा सहित देशभर कई कई हिस्सों में फिलहाल ये समस्या आम हो गई है। अबकी बार सरसों के किसानों पर एक अच्छे उत्पादन की आश ,
लगी थी लेकिन अब किसानो के सामने एक नया संकट उत्पन्न हो गया है।फिलहाल समस्या ये आ रही है। सरसों की लहलाती हुई फसल में पानी देने के बाद सरसों की फसल मुरझा जाती है और जली, हुई फसल के समान दिखने लगती हैं।
गंगानगर, हनुमानगढ़, क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर दिख रहा है ।
कृषि विभाग की टीम लगातार जांच में जुटी है। लेकिन किसान मित्रो अभी तक बीमारी की पुष्टि नहीं हुई हैकिसानो के लिए कृषि विभाग ने कुछ निर्देश दिए हैं,
सरसों की फसल में आप ये समस्या होने पर स्ट्रेपटो साइकिलिन, ब्लू कॉपर आदि का छिड़काव करें,
। और किसान साथियों को उर्वरक का कम उपयोग के निर्देश दिए हैं।
कृषि अनुसंधान केन्द्र बीकानेर के सुझाव
सरसों में होने वाले रोग ; और उनका रोकथाम
चंपा (मोयला किट)
चम्पा एक रस चूसने वाला किट है । यह प्राय हरे रंग का और छोटा मुलायम होता है। जौ फ़सल में फुल्लो के गुच्छों, कच्ची फलियों और पत्तियों की निचली सतह पर, समूह यानी झुंड में पाया जाता है। देरी से की गई बुवाई में, यह सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।
उपाय -रोकथाम—
चंपा का प्रकोप होते ही, । एक सप्ताह के अंदर पौधे की मुख्य शाखा की 10 सेटीमिटर की
लबाई का किट 20 से 25 की संख्या में पाया जाने पर , मैलाथियोन 5 %चूर्ण 25kg, प्रति हेक्टेयर का बुरकाव करें।
इसके अलावा आप मैला थियान 50 ec सवा लिटर या डाय मिथोयट 30 इसी ,
875 मिली लिटर दवा प्रति हैक्टर 400 से 500 लिटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें ।
जैविक नियंत्रण के लिए एजेडीरेक्टिन या नीम तेल का छिड़काव करें
पेंटेड बग कीट
पेंटेड बैग कीट का प्रकोप सरसों फसल के अंकुरण के तुरंत बाद होता है। फसल की 7 से 10 दिन की अवस्था या उम्र में यह कीट पत्तियों के रस को चूस कर फसल को खत्म करने लगता है। पेंटेड बग के बच्चे और वृद्ध दोनों फसल को हानि पहुंचाते हैं जिससे पौधे कमजोर और पीले पढ़कर सूख जाते हैं।
नियंत्रण
पेंटेड बग के रोकथाम हेतु डाय -मिथोयट 30 Ec 1 लिटर प्रति हैक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें
आरा मक्खी किट –
यह सरसों फसल के 20 से 25 दिन अंकुरण के बाद होता है। और फसल को बहुत नुकसान पहुंचाता है ।
आरा मक्खी होने पर पत्तों को छलनी कर दिया जाता है और शिराओं का जाल बचा रहता है।
उपाय रोकथाम –
बिजाई के सातवें दिन मेलाथियान 5% या कार्बोरिल 5% चूर्ण 20 से 25 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सुबह-शाम छिड़काव करें।
आवश्यकता पड़ने पर दूसरा छिड़काव 15 से 20 दिन बाद करें।
तना गलन रोग और नियंत्रण
इस रोग के कारण 35 फ़ीसदी फसल के उत्पादन में कमी होती है। यानी उत्पादन प्रभावित होता है।
तना गलन रोग पानी भराव या तराई क्षेत्र में सबसे ज्यादा पाया जाता है ।
इस रोग से तने के चारों और कवक का जा ल बन जाता है। पौधे मुरझा कर सूखने लगते हैं। ग्रसित ने के सतह पर बुरी सफेद या काली गोल आकृति पाई जाती है।
रोकथाम उपाय _
इसके नियंत्रण के लिए बुवाई से 50 दिन बाद कार्बेंडाजिम 0.1%( 1 ग्राम दवा प्रति एक लिटर पानी) में छिड़काव करें
जरूरत पड़ने पर दूसरा छिड़काव 20 दिन बाद करें
पेंडुल्शा रोग और नियंत्रण
इस रोग का प्रकोप पौधों की निचली पत्तियों से प्रारंभ होता है।
पत्तियों पर छोटे हल्के काले गोल धब्बे बनते हैं। धब्बो में गोल छले नजर आते हैं।
रोकथाम –
फसल में झुलसा, तुलसिता, और सफेद रोटी के होने पर कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 wp या मैंकोजैब 75%wp का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें।
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निवेदन-किसान मित्रों फार्मिंग एक्सपर्ट का उद्देश्य सिर्फ किसानों तक सही जानकारी पहुंच जाना है। फसलों में किसी भी रसायन के छिड़काव से पूर्व कृषि विशेषज्ञ की सलाह अवश्य ले । किसी भी प्रकार की घटना के लिए फार्मिंग एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं है।
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