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बचपन में पिता की मौत हुई, चाय की दुकान पर बर्तन तक धोये अब एलोवेरा की खेती से हर महीने कमा रहे 1 लाख तक रुपए

किसान साथियो आज हम लेकर आये है आपके लिए राजस्थान के हनुमानगढ़ क्षेत्र के परलिका गाँव में रहने वाले 31 वर्षीय अजय स्वामी की कहानी – कैसे उन्होंने चाय की दुकान से खेती का सफ़र तय किया और अब अच्छा खाशा मुनाफा खेत्ति से ले रहे है | अजय पिछले 14 सालो  से एलोवेरा की खेती  ,प्रोसेसिंग कर रहे हैं । अभी अजय एलोवेरा से 45 तरह के प्रोडक्ट बना रहे हैं । उन्होंने एलोवेरा से लड्डू तैयार किया  जो की काफी अच्छा रिस्पॉन्स  ले रहा है । इसकी खेती से अजय हर महीने एक लाख रुपए तक की कमाई कर रहे हैं।

एलोवेरा की खेती
एलोवेरा की खेती

अजय जी का खेती में कोई न्य अनुभव नहीं था | लेकिन उनका मन था कुछ नवाचार करने का इसीलिए उन्होंने खेती को चुना | जहा आज की युवा पीढ़ी खेती से कतराती है | वही अजय जी ने इसी खेती में अपने व्यवसाय को खोजा | अजय के परिवार के पास दो बीघा से थोड़ी ज्यादा की जमीन थी | अजय जी स्वामी ने बताया कि एकदिन की सुबह उन्होंने अखबार में एलोवेरा के बारे में पढ़ा था  और तब अजय जी के दिमाक में एलोवेरा की खेती के बारे में एक अद्भुत विचार आया | हालांकि अजय के पास एलोवेरा की खेती शुरू करने के लिए जरूरी संसाधन नहीं थे|

किसान मित्रो अजय की पढाई को देखा जाये तो – अजय कक्षा 8वीं तक पढ़े हुए है | अजय के  पिता के निधन के बाद अजय के कंधो पर जिमेदारियो भार आ टिका और उन्होंने खुद अपने परिवार के पालन पोषण के लिए वर्ष 1999 में अपनी मां की मदद से 10 रुपये प्रति कप के हिसाब से चाय बेचने का काम शुरू किया था |

चाय से खुद का व्यवसाय शुरू करने की कहानी –

अखबार में एलोवेरा की कहानी पढ़ने के बाद अजय ने सोचा कि क्यों न दो बीघे जमीन का का उपयोग इस के लिए किया और एलोवेरा की खेती की जाये | तभी से अजय ने एलोवेरा के बारे में शोध और अपने समुदाय के किसानों से बातचीत करना प्रारम्भ कर दिया | बातचीत के माध्यम से उन्होंने  पता लगाया कि एलोवेरा की खेती करने के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है | उनके दिल में यह बात जगह कर गयी क्योंकि राजस्थान में अक्सर सूखा पड़ता रहता हैऔर बारिश भी अनिश्चितता की होती है ,जिससे ऐसी फसल की खेती करना अजय के लिए मुश्किल हो जाता था जिसके जिए अत्यधिक पानी की जरूरत हो |

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उन्होंने एलोवेरा पौधों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक और मिट्टी के उपयोग के बारे में जानकारी जुटाई | इसके बारे में अजय ने ऑनलाइन बहुत शोध किया ||  हालाँकि अजय का खेती में यह पहला प्रयास था,इसलिए उन्हें अधिक ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं. इसके साथ ही उन्होंने अपनी चाय की दुकान को निरंतर जारी रखा  |  उन्होंने एलोवेरा की आपूर्ति बढ़ाने के लिए अपनी चाय  की दुकान से बचाए गए पैसों का इस्तेमाल किया |  अजय को अंदेशा नहीं था कि उनकी एलेवेरा की फसल इतनी शानदार मुनाफा देगी |

एलोवेरा की खेती से फ़िलहाल अजय की कमाई –

अजय का कहना है कि वह खुश हैं कि उन्होंने सही खेती को चुना क्योंकि एलोवेरा की खेती के बाद में इसके व्यवसाय से उन्हे अच्छा  मुनाफा मिल रहा है | अजय बचपन में एलोवेरा के लड्डू खाते हुए याद करते हैं और बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इसका इस्तेमाल किया और आज एलोवेरा से बने दो तरह के लड्डू बाजार में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इन लड्डूओं की कीमत 350 से 400 रुपए प्रति किलो है। अजय के अनुसार उद्योग में हर किसान की सफलता की कुंजी नवाचार है।

अजय साबुन, टूथपेस्ट ,मिठाई, शैम्पू, कंडीशनर, जूस,जैसी 45 चीजें एलोवेरा से तैयार कर के मार्केट में बेचते हैं | अजय के अनुसार , ठीक से एलोवेरा की खेती और प्रोसेसिंग की जाए तो एक एकड़ जमीन से एक लाख रुपए सालाना  मुनाफा कमाया जा सकता है |  अजय का मानना है की इसकी शुरुआत थोड़ी सी जमीन पर पारंपरिक खेती से की जा सकती है। बाद में जब काम जम जाए तो धीरे-धीरे दायरा बढ़ाना चाहिए।

एक एकड़ जमीन में एक हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। अगर इनकी ठीक से देखभाल और प्रसंस्करण किया जाए, तो ये प्रति एकड़ लाखों रुपये सालाना कमा सकते हैं।