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क्या सरसों में बन सकती है तेजी? देखे सरसों तेजी मंदी रिपोर्ट सरसों भविष्य 223

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करेंगे की क्या सरसों में बन सकती है तेजी? दोस्तों तेल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से सरसों के दाम घटे राजस्थान की जयपुर मंडी में 25 रुपए का मंदा देखने को मिला। इस मंदे के साथ भाव 5200 रुपए प्रति क्विंटल पर रह गये। जबकि भरतपुर मंडी में आज 12 रुपए प्रति क्विंटल का सुधार देखने को मिला। इस सुधार के साथ भाव 4902 रुपए प्रति क्विंटल या पहुंच गये। दिल्ली लारेंस रोड पर आज 50 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़त देखने को मिली। इस बढ़त के साथ भाव 5050 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गये।

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उत्तर प्रदेश की सलौनी प्लांट सरसों में आज 25 रुपए गिरावट के साथ भाव खोले। इस गिरावट के साथ सलौनी शमशाबाद भाव 5650 रुपए, दिग्नेर भाव 5650 रुपए, अलवर भाव 5575 रुपए, कोटा भाव 5525 रुपए प्रति क्विंटल पर रह गये। मध्य प्रदेश की मुरैना मंडी में आज 50 रुपए का मँदा देखने को मिला। इस मंदे के साथ भाव 4880 रुपए प्रति क्विंटल देखने को मिले। देश की उत्पादक मंडियों में सरसों की आवक 7 लाख 50 हजार बोरी की हुई जोकि गत दिन से 50 हजार कम आवक आई।

सरसों का भाव MSP से भी निचे

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सरसों का भाव समर्थन मूल्य से नीचे होना चिंता का विषय स्वदेशी तिलहन-तेल उद्योग व्यापार क्षेत्र के एक अगृणी संगठन सॉल्वेड एक्सटैक्टसॆ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अध्यक्ष ने अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सरसों का भाव सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे होने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आगाह किया है। कि इससे अगले रबी सीजन में इस सबसे प्रमुख तिलहन की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट सकता है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने सरसों का एमएसपी पिछले साल के 5050 रुपए प्रति क्विंटल से 400 रुपए बढ़ाकर चालू वर्ष के लिए 5450 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक प्रांतों में इसका थोक मंडी भाव 4500/5000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।

इस पर भी मंडी शुल्क एवं अन्य प्रभारों को काटकर किसानों को कम मूल्य दिया जाता है। हालांकि सरकारी एजेंसी- नैफेड द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद की जा रही है। लेकिन इसकी रफ्तार धीमी होने से बाजार भाव पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ रहा है। इसके अलावा विदेशों से काफी सस्ते दाम पर पाम तेल, सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल का भारी आयात होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और खासकर सरसों तेल तथा सोयाबीन तेल का भाव बहुत घट गया है।

जिससे मिलर्स को ऊंचे मूल्य पर सरसों खरीदने का अवसर एवं प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। ‘सी’ के अध्यक्ष का कहना है। कि सरकार देश में सरसों का उत्पादन बढ़ाकर वर्ष 2025-26 तक 200 लाख टन पर पहुंचाने का इरादा रखती है। और इसके लिए जोरदार प्रयास भी कर रही है।

पिछले चार वर्षों के दौरान सरसों के न्यूनतम् समर्थन मूल्य में 1000 रुपए प्रति क्विंटल से भी अधिक का इजाफा किया गया है। पिछले दो साल से इसका दाम समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा होने के कारण न तो सरकारी एजेंसी को इसकी खरीद के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता पड़ी और न ही उत्पादकों को कोई समस्या हुई लेकिन इस बार हालात भिन्न हैं।

बिजाई के समय सरसों का दाम काफी ऊंचा होने से किसानों को इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने का प्रोत्साहन मिला मगर फसल की कटाई तैयारी के दौरान इसका भाव नीचे लुढ़क गया और अब भी समर्थन मूल्य से काफी नीचे है। सरकार को ऐसा उपाय करना चाहिए जिससे सरसों उत्पादकों को कम से कम एमएसपी अवश्य हासिल हो सके।

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