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हाज़िर माल की कमी के कारण चना के भाव में तेजी फिर लौटेगी देखे ताजा रिपोर्ट 2023

नमस्कार किसान साथियों चना के भाव में तेजी कब आयेगी आज की इस पोस्ट में जानेंगे । चना का भाव क्या रहा है । और कब तक बढेगा सभी जानकारी पोस्ट में दी गई है ।

देसी चना-समीक्षा (आगे बाजार तेज रहेगा)

उत्पादक मंडियों में देसी चने की आवक में भारी कमी को देखकर सरकार द्वारा 3 जुलाई से खुले बाजार में बफर स्टॉक का चना बेचने का ऐलान कर दिया था, जो सरकारी माल मंडियों में बिकने लगे हैं, लेकिन उसके भाव 4900/4975 रुपए प्रति क्विंटल होने से दाल मिलों को पड़ता नहीं लग रहा है। यही कारण है कि बाजार सुधर कर 5200 रुपए प्रति क्विंटल लारेंस रोड खड़ी मोटर में हो गया है । अत: बाजार में घटने की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि उत्पादक मंडियों से बहुत कम आ रहा है। दिल्ली हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग खुलते ही अच्छी तेजी आ जाएगी।

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हाजिर माल की कमी से देसी चने में 300 की और तेजी संभव

देसी चने के उत्पादन में इस बार पोल रहा है, इस वजह से सरकार बफर स्टॉक से देसी चना बेच रही है, लेकिन वह भी इस बार ऊंचे भाव होने से प्राइवेट सेक्टर का चना धीरे धीरे बढ़ने लगा है तथा इसमें 300 रुपए प्रति क्विंटल की और तेजी लग रही है।देसी चने का उत्पादन इस बार मध्य प्रदेश महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक सहित सभी उत्पादक राज्यों में 20-22 प्रतिशत कम से होने की धारणा बन गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि गत वर्ष देसी चने में मंदा चलने से किसानों का रुझान इसकी बजाय मटर मसूर की खेती में ज्यादा हो गया था।

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यही कारण है कि बिजाई रकबा घट गया है। दूसरी ओर प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भी कम रहा हैं। महाराष्ट्र में बिजाई कम होने के साथ-साथ 7 प्रतिशत उत्पादकता कम रही है, मध्यप्रदेश के इंदौर भोपाल सागर लाइन में भी यील्ड 4 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर कम आया हैं, ग्वालियर ‘यील्ड ठीक-ठाक है, लेकिन वहां बिजाई कम होने से आवक कम हो रही है। सतना जबलपुर लाइन में भी आवक समाप्त हो गई है

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राजस्थान में बिजाई कम होने से सकल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उसमें दाने बढ़िया नहीं निकले थे, क्योंकि मौसम भी खराब रहा है। दूसरी ओर वहां भी बिजाई रकबा 27-28 प्रतिशत घटा है। वहां पर सरसों एवं मसूर की खेती ज्यादा किसानों ने किया है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए 110 लाख मैट्रिक टन से घटकर 70 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान आ रहा है।

चना का एमएसपी और बिक्री

सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य 5350 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है तथा अप्रैल-मई के महीने में सरकार किसानों से देसी चना 16 लाख मीट्रिक टन के करीब किया था, ऐसा अनुमान है। इस वजह से उत्पादक मंडियों में भी किसानी चने की आवक घट गई है तथा दाल मिलें माल की कमी से खरीद करने लगे हैं, जिससे 4900/4950 रुपए प्रति क्विंटल का इंदौर लाइन में 5000/5075 रुपए लूज में बोलने लगे हैं। टेंडर का सरकारी चना 4950/4975 रुपए मंडियों में बिकने लगे हैं, जिस कारण यहां भी राजस्थानी चना, जो एक सप्ताह पहले 5050 रुपए बिका था, उसके भाव 5180 हो गए हैं तथा कुछ कारोबारी 5200 रुपए भी बोल रहे हैं।

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सरकार द्वारा देसी चने की बिक्री की जा रही है, लेकिन पड़ते के अभाव में ज्यादा मंदा बेचने की इच्छुक नहीं है। न्यूनतम समर्थन मूल्य 5350 रुपए में खरीद किया गया है, जो सरकार के घर में ब्याज भाड़ा लगाकर 5600 रुपए का पड़ता लग रहा है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए राजस्थानी चना 5500 रुपए प्रति क्विंटल रक्षाबंधन से पहले बन सकता है।

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